Wednesday, February 11, 2026
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जैसलमेर ,पोकरण में बढ़ने लगे है आवारा कुत्तों से घाव

कुलदीप छंगाणी / जैसलमेर

सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना जैसलमेर जिले में धड्डले से की जा रही है ।
माननीय न्यायालयों ने तो मानव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शहरों से आवरा कुत्तों को हटाने के आदेश सख्ती से लागू कर दिए है लेकिन लगता है जैसलमेर जिले के नगरीय निकायों में बैठे जिम्मेदारों को इसकी कोई परवाह ही नही है । जैसलमेर के पोकरण में हर रोज लगभग औसत तीन लोगों को कुत्ते काट रहे है तो वहीं जैसलमेर शहर में औसत 10 लोग हर रोज आवारा कुत्तों के शिकार हो रहे है । ये वो आंकड़े है जो लोग अस्पताल में रेबीज का इंजेक्शन लगाने जाते है हकीकत इससे भी ज्यादा डरावनी हो सकती है ।

जैसलमेर शहर में पिछले तीन महीनों में 727 लोग डॉग बाइट से घायल हो गए है तो वहीं पोकरण कस्बें में पिछले तीन माह में 223 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए है ।

मानव जीवन पर कुत्तों के घाव के तीन केस


हाल ही में पोकरण में गढ़ी चंपावता निवासी 75 वर्षीय नारायण राम को वाल्मीकि बस्ती के पास कुत्ते ने काट लिया तो वह गंभीर रूप से घायल हो गए । नारायण राम जैसलमेर जा रहे है थे लेकिन बीच में ही कुत्ते ने काट लिया तो अस्पताल जाना पड़ा ।

ऐसे ही जैसलमेर जिले के खेतोलाई गांव के रहने वाले 40 वर्षीय नेमीचंद बिश्नोई बताते है कि पिछले दो सप्ताह में गांव के 7 लोगों को कुत्तों ने काट लिया है जिसमें एक 70 साल का बुजुर्ग और एक बच्चा भी शामिल है । वहीं जानकारी के अनुसार इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर हिरण , गाय व अन्य पशुओं पर भी कुत्तों के हमले के मामलों में बढ़ोतरी हुई है ।

जैसलमेर के रामगढ़ में रविवार की रात को एक पशु बाड़े में भेड़ों पर हमला हो गया जिससे वहां बंधे हुए 130 भेड़ों की मौत हो गई । जैसलमेर पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ उमेश के अनुसार यह हमला संभवतः जंगली कुत्तों का लग रहा है क्योंकि पूर्व में भी कुत्तों ने इस तरह के हमले किए है । पशुपालक परिवार का इस हमले से करीब 6 लाख रुपए का नुकसान हुआ है ।

डॉग बाइट के बाद नारायण राम के पांव पर जख्म

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी निगम के अधिकारी लापरवाह


सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद भी जिले में आवरा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है । जहां जिले में कई जगहों पर एनजीओ द्वारा अपने स्तर पर कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी करने का प्रयास किया जा रहा है तो वहीं सरकारी सिस्टम तमाम संसाधनों के बावजूद हाथ पर हाथ धरा बैठा है । यहां तक कि पोकरण नगरपालिका का कार्यालय भी इस कुत्तों के आतंक से बच नहीं पा रहा है । कार्यालय में कुत्तों का जमावड़ा कई बार देखा जाता है जो यहां आने वाले नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता है ।

सरकारी दावों के उलट यह है हकीकत


राजस्थान में स्वायत शासन विभाग ने कहने को तो 14 नवंबर को एक आदेश जारी कर सभी जिला कलेक्टर , नगर निगम ,नगर परिषद और पालिका को आदेशित कर दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को पकड़कर टीकाकरण ,नसबंदी और कृमिनाशक मुक्ति करना सुनिश्चित करें । लेकिन लगता है इन आदेशों की पालना कागजों में ही हो रही है ।

नवंबर 2025 में पोकरण नगरपालिका ने सभी वार्डों और सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण व नसबंदी करने का ठेका ‘सिद्धि एनिमल वेलफेयर’ नामक फर्म को 1900 रुपये प्रति कुत्ता की दर से दिया था। शर्तों के अनुसार कुत्तों को 5 दिन तक शेल्टर होम में रखने के बाद उसी क्षेत्र में छोड़न था। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद एक भी कुत्ता शेल्टर होम में नहीं लाया गया। जब हमारी टीम नगरपालिका द्वारा बनाए गए शेल्टर होम पहुंची तो वहां ताला लगा मिला और कोई भी व्यवस्था नजर नहीं आई।

पोकरण में नगरपालिका द्वारा बनाया गया शेल्टर होम


नगरपालिका ईओ झब्बर सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे न तो कार्यालय में मिले और न ही उन्होंने फोन रिसीव किया। बहरहाल पोकरण में एक भी कुत्ता नही पकड़ा गया लेकिन कहने को यह फर्म कुत्ता पकड़ने का कार्य कर रही है ।


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