लोहटा गांव में खजूर बागों की बहार, किसानों की आय में संभावित इजाफा

जैसलमेर के रेगिस्तान में लहराई समृद्धि की फसल

लोहटा गांव के खजूर बाग में दो किसान, एक किसान खजूर की बड़ी गुच्छी पकड़े हुए।
लाठी क्षेत्र के लोहटा गांव में खजूर की तुड़ाई करते किसान। इस बार फसल में बंपर झड़ से किसानों में खुशी की लहर है।
स्थान: लाठी (जैसलमेर) रिपोर्ट: गोविन्द पंवार 

राजस्थान के जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र का लोहटा गांव इन दिनों खजूर की बंपर फसल को लेकर सुर्खियों में है। बागों में खजूर की भारी झड़ लगने से किसान न केवल उत्साहित हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी राहत महसूस कर रहे हैं। इस बार मौसम पूरी तरह अनुकूल रहा, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।


बागों में तुड़ाई जोरों पर, सीधी खरीद से बढ़ा मुनाफा

गांव के किसान भुट्टे खान और मुजफ्फर खान बताते हैं कि खजूर की फसल उनकी आय का प्रमुख स्रोत है। तुड़ाई कार्य इन दिनों जोरों पर है और व्यापारी खेतों तक पहुंचकर सीधे खजूर की खरीदारी कर रहे हैं। इससे किसानों को बाजार की उचित कीमत मिलने लगी है और बिचौलियों पर निर्भरता भी घट रही है।


लोहटा बन रहा खजूर उत्पादन का केंद्र

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लोहटा गांव की जलवायु और मिट्टी खजूर की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। यदि समय पर सरकारी सहयोग और तकनीकी प्रशिक्षण मिले, तो यह गांव खजूर उत्पादन में जैसलमेर जिले का मॉडल बन सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, खजूर आधारित प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज और सशक्त विपणन नेटवर्क की स्थापना से गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।


बाजार में ताजी खजूर की मांग, बेहतर दाम मिलने की उम्मीद

गर्मी और सावन के मौसम में ताजी खजूर की मांग बढ़ जाती है। लोहटा के किसान बताते हैं कि इस बार कीमतें ₹80 से ₹120 प्रति किलो तक मिल रही हैं। यह दर पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है, जिससे किसानों की आय में प्रत्यक्ष इजाफा हो रहा है।


लोहटा गांव की खजूर खेती ने यह साबित कर दिया है कि मरुस्थलीय इलाकों में भी हरियाली की संभावनाएं मौजूद हैं। उचित मार्गदर्शन, बाजार और नीति समर्थन के साथ यह खेती न केवल जैसलमेर की पहचान बन सकती है, बल्कि ग्रामीण विकास का मजबूत आधार भी।


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