फोटो स्टोरी: “रेगिस्तान में जीवन की नीली मुस्कान, रिगणी का फूल

कुलदीप छंगाणी : जैसलमेर    फोटो: सुमेर सिंह सांवता

जैसलमेर जहां की तपती धरती गर्मियों में जितनी तपिश देती तो वहीं मानसून की हल्की सी आहट के साथ यह धरती ,धोरे ,और प्रकृति मन के भीतर ठंडक का अहसास कराने लगते है । मानसून के बाद यहां के रेगिस्तानी वनस्पति में एक नई जान आ जाती है जिससे यहां का पारिस्थितिकी तंत्र खिल उठता है ।

जैसलमेर के देगराय ओरण से पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह संवाता ने हमें जैसलमेर में बारिश के बाद खिल आए
रिगणी का फूलों की तस्वीर भेजी है । हरी घास के बीच उगते नीले फूलों वाले यह कांटेदार पौधे रेगिस्तान में जीवन की जिजीविषा के प्रतीक हैं। इस फोटो में सुमेर सिंह सांवता ने थार के पारिस्थितिकी तंत्र की उस कोमल परत को पकड़ा है, जो अक्सर नज़रों से छूट जाती है।
इस फोटो के बैकग्राउंड में दिख रहा खेजड़ी का पेड़ ,जमीन पर उगती रिगणी, और इधर-उधर छिपी घासें देखकर आप रेगिस्तान के पारिस्थितिकी तंत्र के खिले हुए स्वरूप को देख सकते हो ।

फोटो: देगराय ओरण में बारिश के बाद का नजारा

थार की पहचान है रिगणी का पौधा
‘रिगणी’ पश्चिम राजस्थान की बलुई मिट्टी में होने वाला एक कांटेदार पौधा, जो दिखने में भले ही कठोर लगे, पर इसका फूल रेगिस्तान की सबसे सुंदर कहानियों में से एक है। इसके बैंगनी फूल न केवल जैव विविधता का हिस्सा हैं, बल्कि कई कीट-पतंगों, मधुमक्खियों और पक्षियों के लिए आहार का स्रोत भी हैं


Discover more from THAR CHRONICLE

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Google search engine

Leave a Reply