Wednesday, February 25, 2026
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जैसलमेर में 6–8 मार्च को ऐतिहासिक चादर महोत्सव, 7 मार्च को 1.08 करोड़ श्रद्धालुओं का सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ

जयपुर/जैसलमेर। सरहदी जिले जैसलमेर में 6 से 8 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय भव्य चादर महोत्सव और दादागुरु इकतीसा पाठ का आयोजन होगा। महोत्सव का शुभारंभ मोहन भागवत करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 7 मार्च को विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प रहेगा। आयोजन दादा गुरूदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव समिति के तत्वावधान में हो रहा है।

कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में सम्पन्न होगा, जबकि प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागर जी हैं। समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा तथा संयोजक तेजराज गोलेछा हैं। आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान, विद्या भारती सहित अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि सहभागी होंगे।


871 वर्षों बाद पहली बार होगा विधिवत अभिषेक

समिति के अनुसार यह अभियान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान है। 871 वर्षों बाद पहली बार चादर का विधिवत अभिषेक किया जाएगा। इससे पूर्व जैसलमेर किला से भव्य वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल तक लाया जाएगा।

8 मार्च को उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा।


दुनियाभर से जुड़ेगे श्रद्धालु

दादागुरु इकतीसा कार्यक्रम के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रकाश चंद्र लोढ़ा ने बताया कि निर्धारित समय पर देश–विदेश के विभिन्न नगरों में श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों से एक साथ पाठ करेंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। महोत्सव में करीब 400 संतों की उपस्थिति और लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं की तीन दिवसीय सहभागिता अपेक्षित है।


डेडानसर मैदान में तैयारियां जोरों पर

जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली के अनुसार डेडानसर मैदान में पिछले एक महीने से विशाल डोम टेंट्स लगाए जा रहे हैं। महोत्सव स्थल पर संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। दादागुरु जिनदत्त सूरी के लगभग 20 हजार भक्त देश-दुनिया से जैसलमेर पहुंचेंगे।


ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा महोत्सव

आयोजन समिति के सचिव पदम टाटिया ने बताया कि प्रथम दादागुरु आचार्य श्री जिनदत्त सूरी 11वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक आचार्य माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार अजमेर में राजा अर्णोराज द्वारा प्रदत्त भूमि पर उनका अग्नि-संस्कार हुआ, जहाँ चादर का न जलना एक अलौकिक घटना के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। वर्तमान में यह चादर जैसलमेर दुर्ग स्थित श्री जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार में सुरक्षित है।


दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी

7 और 8 मार्च 2026 को “भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता में दादागुरु परंपरा का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, प्राकृत भारती संस्थान तथा समाज एवं संस्कृति अध्ययन केंद्र सहित कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी होंगे।

यह महोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता के संदेश के रूप में भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।


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