कुलदीप छंगाणी / पोकरण
जैसलमेर जिले के पोकरण में इन दिनों होली का एक अनोखा रूप चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां जगह-जगह फाग महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लोग फूलों और भजनों के साथ होली का उत्सव मनाते हैं। खास बात यह है कि इस उत्सव में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर भाग लेती हैं, क्योंकि यहां फूहड़ता और अश्लीलता का प्रदर्शन नहीं होता।
रविवार को पोकरण के हृदय स्थल गांधी चौक में आयोजित फाग महोत्सव के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पूरा चौक होली के रंग में सराबोर नजर आया।

इस कार्यक्रम का आयोजन पोकरण नगरपालिका के पूर्व पार्षद नारायण रंगा द्वारा किया गया। रंगा हर वर्ष इस तरह के आयोजन करते हैं, जिसमें शहर के सभी वार्डों से लोग शामिल होते हैं। उनका कहना है कि इस फाग महोत्सव में किसी को औपचारिक निमंत्रण देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। लोग अपनी इच्छा से इस प्रेम और सौहार्द के उत्सव में भाग लेते हैं तथा पुराने मन-मुटाव भुलाकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं। होली के भजनों का गायन करने वाले गायकों को ‘रसिया’ कहा जाता है, जो स्थानीय समुदाय के ही लोग होते हैं।
क्यों अनोखी है यह होली?
पोकरण में फाग महोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली यह होली अपेक्षाकृत नई परंपरा है। लगभग दस वर्ष पूर्व इस प्रकार की होली खेलने की शुरुआत हुई। जानकारों के अनुसार, यह परंपरा वृंदावन से प्रभावित है। पोकरण के कई लोग होली मनाने वृंदावन जाते रहे हैं। वहीं से प्रेरित होकर यहां रंगों की जगह फूलों से होली खेलने और गालियों की बजाय भजनों के गायन की परंपरा शुरू हुई।

आज पश्चिम राजस्थान के अन्य शहरों, विशेषकर बीकानेर और फलोदी की तुलना में यहां होली के दौरान फूहड़ता का प्रदर्शन न के बराबर देखने को मिलता है। जबकि पहले पोकरण में भी होली के अवसर पर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करना और सार्वजनिक रूप से गालियां देना आम बात थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समाज सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ा है और अब होली के अवसर पर यहां फूलों और भक्ति का रस बरसता नजर आता है।
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