दौसा, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को दौसा जिला अस्पताल का दौरा कर उपचाराधीन सिलिकोसिस मरीजों से मुलाकात की। मरीजों की दयनीय स्थिति और आर्थिक सहायता के अभाव की जानकारी मिलने पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कांग्रेस सरकार ने शुरू की थी सिलिकोसिस सहायता
श्री गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इस जानलेवा बीमारी को लेकर हमेशा मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में प्रदेश में पहली बार सिलिकोसिस पॉलिसी बनाकर पीड़ितों को संबल दिया गया था, जिसमें बीमारी का पता चलने पर 1 लाख रुपये तथा मृत्यु पर 3 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान था।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2019 में नई नीति लागू कर राहत राशि को बढ़ाकर कुल 5 लाख रुपये किया गया, जिसमें बीमारी का पता चलने पर 3 लाख रुपये तथा मृत्यु पर 2 लाख रुपये की सहायता निर्धारित की गई। साथ ही 1500 रुपये मासिक पेंशन और पालनहार योजना जैसी सुरक्षा योजनाएं भी लागू की गई थीं।

वर्तमान स्थिति पर प्रहार: “सिर्फ कार्ड बन रहे, सहायता गायब”
अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों से संवाद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में स्थिति बेहद निराशाजनक है। सरकार द्वारा पोर्टल पर कार्ड तो जारी किए जा रहे हैं, लेकिन निर्धारित सहायता राशि महीनों से अटकी हुई है।
उन्होंने कहा कि कई मामलों में मरीजों की मृत्यु के बाद भी उनके परिजनों को आर्थिक सहायता के लिए भटकना पड़ रहा है। सिलिकोसिस मरीजों को प्रतिदिन ऑक्सीजन और दवाइयों पर भारी खर्च उठाना पड़ता है, ऐसे में सहायता रोकना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

सांसद मुरारीलाल मीणा की पहल की सराहना
श्री गहलोत ने मुरारीलाल मीणा के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि उनके निरंतर हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी जल्द ही क्षेत्र का दौरा कर सिलिकोसिस पीड़ितों की स्थिति की समीक्षा करेगी।
सरकार से मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से मांग की कि राजनीति से ऊपर उठकर सिलिकोसिस पीड़ितों के लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं तथा अस्पतालों में ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
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