पोकरण। राजस्थान विधानसभा में वर्ष 2026-27 की बजट मांगों पर चर्चा के दौरान पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज ने पोकरण शहर की प्रसिद्ध लाल मिट्टी टेराकोटा कला और कुम्हार समाज के हितों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
विधायक ने सदन में कहा कि पोकरण की लाल मिट्टी से बनने वाले टेराकोटा उत्पादों ने राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां के कारीगर पारंपरिक तकनीक से कलात्मक घड़े, सुराही, सजावटी वस्तुएं, मूर्तियां और विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करते हैं, जिनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।
औद्योगिक आवंटन रद्द करने की मांग
महंत प्रतापपुरी महाराज ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लाल मिट्टी वाले क्षेत्र को औद्योगिक विकास के लिए रीको को आवंटित कर दिया गया था। उन्होंने इस निर्णय को स्थानीय कला और कारीगरों के हितों के प्रतिकूल बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की लाल मिट्टी उपलब्ध है, उसे संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा सकें। साथ ही सुझाव दिया कि रीको के लिए अन्य उपयुक्त भूमि चिन्हित की जाए, जिससे औद्योगिक विकास भी प्रभावित न हो और पारंपरिक शिल्प उद्योग भी सुरक्षित रह सके।
लाल मिट्टी ने दिलाई नई पहचान
विधायक ने कहा कि लाल मिट्टी से बने उत्पादों ने परमाणु नगरी पोकरण को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कुम्हार समाज के कारीगरों को विशेष प्रशिक्षण देने की मांग करते हुए कहा कि आधुनिक डिज़ाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से जोड़कर इन उत्पादों को देश-विदेश के बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।
इसके लिए सरकार को विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने चाहिए और युवाओं को कौशल विकास योजनाओं से जोड़ना चाहिए।
स्थायी रोजगार व सहकारी समितियों की मांग
महंत प्रतापपुरी महाराज ने टेराकोटा उद्योग से जुड़े परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने, सहकारी समितियों का गठन करने तथा उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि लाल मिट्टी क्षेत्र का संरक्षण और कारीगरों का सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाता है, तो पोकरण का टेराकोटा उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
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