सूरतगढ़। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजियासर स्टेशन स्थित एक निजी विद्यालय परिसर में राजस्थानी भाषा जलसा आयोजित किया गया, जिसमें राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा देने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग जोर-शोर से उठी।
दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि मुरलीधर ने कहा कि यदि प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक राजस्थानी भाषा लागू की जाती है तो युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और प्रदेशवासियों का सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने इसे सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा विषय बताया।

आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
मुख्य वक्ता डॉ. गौरीशंकर निमिवाळ ने मातृभाषा दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना समय की मांग है। उनके अनुसार इससे प्रदेश को वास्तविक पहचान मिलेगी और भाषा संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
जनगणना में राजस्थानी दर्ज कराने का आह्वान
मनोज कुमार ने आगामी जनगणना में मातृभाषा के रूप में राजस्थानी दर्ज कराने का आह्वान किया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों और कलाकारों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोकगीतों पर रंगारंग प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने “जय राजस्थान, जय राजस्थानी” के नारों के साथ भाषा आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया।
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