स्थान: रामदेवरा/जयपुर रिपोर्टर: लक्ष्मण राम, थार क्रॉनिकल
राजस्थान के शैक्षणिक भविष्य को नई दिशा देने और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से जयपुर में आयोजित दो दिवसीय “राजस्थान ज्ञान सभा” में रामदेवरा सहित प्रदेशभर के शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास तथा जेईसीआरसी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय मूल्यों और आधुनिकता के संतुलन पर व्यापक मंथन हुआ।
संस्कारयुक्त शिक्षा से ही होगा समग्र विकास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और समाज निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का समावेश ही भारत को पुनः “विश्व गुरु” बना सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा जीवन मूल्यों पर आधारित रही है और “ज्ञान सभा” उसी परंपरा को वर्तमान संदर्भ में पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

नवाचारों की सराहना, मातृभाषा पर जोर
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश चंद्र पोखरियाल ने जालौर के शिक्षाविद संदीप जोशी के नवाचारों—इतिहास संकलन, कन्या पूजन और मल्टी टैलेंट पोस्ट—की सराहना की। उन्होंने इसे संस्कार आधारित शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए मातृभाषा में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर बल दिया।

भारतीयता को अपनाने की आवश्यकता
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय बौद्धिक प्रमुख सुनील सुखदेव भाई मेहता ने की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, लेकिन आधुनिकता के प्रभाव में हम उनसे दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने भारतीयता को पुनः अपनाने और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने पर जोर दिया।

प्रदेशभर से शिक्षाविदों की भागीदारी
इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय संस्थानों के निदेशक और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जोधपुर प्रांत से संदीप जोशी, चंद्रशेखर कच्छावा, देवाराम गोदारा, दीपिका शर्मा, अश्विन राजपुरोहित, शांतिलाल दवे और वचनाराम काबावत सहित कई शिक्षाविदों ने भाग लिया। वहीं जैसलमेर, बाड़मेर सहित अन्य जिलों से भी शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही।
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