सूरतगढ़ | थार क्रॉनिकल
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा, राजस्थान) के आह्वान पर राज्यभर के राज सेस महाविद्यालयों में प्रस्तावित टीचर एसोसिएट की संविदा भर्ती नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ के समस्त संकाय सदस्यों ने काली पट्टी बांधकर नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
संविदा भर्ती से शिक्षा व्यवस्था पर संकट
इकाई सचिव डॉ. अन्तर्यामी कौशिक ने बताया कि प्रस्तावित योजना के तहत नियुक्त शिक्षकों को शिक्षा सहायक पदनाम दिया जाएगा और उन्हें मात्र पाँच वर्षों के लिए संविदा पर ₹28,500/- प्रतिमाह के फिक्स वेतन पर रखा जाएगा। उनका कहना था कि यह नीति न केवल शिक्षकों में अस्थिरता व असुरक्षा की भावना पैदा करती है, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
NEP 2020 के उद्देश्यों से विपरीत कदम
संकाय सदस्यों ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को अधिक विकल्प देने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर संविदा आधारित नियुक्तियाँ इस लक्ष्य के विपरीत हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा राज सेस महाविद्यालयों के गठन के अंतर्गत लगभग 300 महाविद्यालय खोले गए थे तथा वर्तमान सरकार ने भी इस कड़ी में करीब 70 नए महाविद्यालय शुरू किए हैं। नियमित शिक्षकों के अभाव में इन संस्थानों में शिक्षा का स्तर NEP-2020 के अनुरूप नहीं बन पा रहा, जो गंभीर चिंता का विषय है।
ज्ञापन सौंपकर की नीति वापसी की मांग

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा, राजस्थान) द्वारा उच्च स्तर पर बार-बार विषय उठाए जाने के बावजूद सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर राज्यव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया गया। विरोध प्रदर्शन के पश्चात संकाय सदस्यों ने माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भरत जय प्रकाश, उपखंड अधिकारी सूरतगढ़ को सौंपा।
बड़ी संख्या में संकाय सदस्य रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में डॉ. रंजीत कौर, जयंत मल्होत्रा, डॉ. गुरजीत सिंह बाजवा, डॉ. अन्तर्यामी कौशिक, डॉ. महबूब मुगल, डॉ. सुनील पूनिया, मनीष कुमार गोदारा, विनोद कुमार, लक्ष्मीदेवी नंदा, पीताम्बर मंगानी, राजन सिंह, कुमारी पारुल भटेजा, अंजू, डॉ. मनोज सैनी, डॉ. गौरीशंकर निमिवाळ, डॉ. चंद्रकांत चावला सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
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