पीसांगन, अजमेर / ओमप्रकाश चौधरी
पीसांगन उपखंड क्षेत्र के पिचोलिया गांव में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां एक कमांडो दूल्हे ने टीका प्रथा के तहत मिले 11 लाख रुपये लौटाकर दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सशक्त संदेश दिया। दूल्हे ने सगुन के तौर पर केवल 1 रुपया और नारियल स्वीकार कर समाज को दहेज मुक्त बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल की।
सगुन में 1 रुपया और नारियल किया स्वीकार
जानकारी के अनुसार पिचोलिया निवासी विक्रमसिंह मेड़तिया (राठौड़) की पुत्री पूजा कंवर की बारात जहाजपुर के धुंवाला गांव से समधी मोहनसिंह राणावत के साथ बीती शाम पिचोलिया पहुंची। विवाह रस्मों के दौरान वधु पक्ष की ओर से दूल्हे शंभुसिंह राणावत, जो कि एनएसजी में कमांडो हैं, को नारियल व 11 लाख रुपये टीके के रूप में सगुन स्वरूप भेंट किए गए।
लेकिन दूल्हे शंभुसिंह राणावत ने समाज के सामने मिसाल पेश करते हुए 11 लाख रुपये में से केवल 1 रुपया और नारियल सगुन के रूप में स्वीकार किया तथा शेष पूरी राशि ससुराल पक्ष को लौटा दी।
“मुझे पढ़ी-लिखी पत्नी चाहिए, दहेज नहीं”
दूल्हे शंभुसिंह राणावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें दहेज नहीं, बल्कि पढ़ी-लिखी और संस्कारी जीवनसाथी चाहिए। उनका उद्देश्य समाज में व्याप्त दहेज प्रथा (टीका प्रथा) जैसी कुरीतियों को समाप्त करना और बेटियों के सम्मान को बढ़ावा देना है।
उनके इस निर्णय से दुल्हन के पिता विक्रमसिंह मेड़तिया भावुक हो गए। समारोह में उपस्थित ग्रामीणों और समाजजनों ने इस पहल की खुलकर सराहना की।
ग्रामीणों और समाजजनों ने की सराहना
इस पुनीत कार्य की राजपूत समाज सहित पिचोलिया प्रशासक अनोप कंवर, प्रशासक प्रतिनिधि नाहरसिंह राठौड़, तत्कालीन पंचायत समिति सदस्य बीरसिंह राठौड़, पूर्व पंचायत समिति सदस्य ओमसिंह राठौड़ सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों ने प्रशंसा की।
कमांडो दूल्हे की यह पहल उपखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे दहेज मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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