पादूकलां। समाज में समानता और न्याय की स्थापना ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। इसी उद्देश्य के तहत विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, सैंसड़ा में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्शन प्लान की पालना में किया गया।
कार्यक्रम अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेड़ता के निर्देशानुसार आयोजित हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष अरुणकुमार बेरीवाल (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) एवं सचिव स्वाति शर्मा के निर्देशन में अधिकार मित्र जुगल सिंह सोलंकी ने विद्यार्थियों को सामाजिक न्याय, मानवाधिकार एवं समान अवसरों के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
समान अवसर ही प्रगति का आधार
जुगल सिंह सोलंकी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग — विशेषकर कमजोर, वंचित और पिछड़े तबकों — को न्याय दिलाना है। उन्होंने बताया कि गरीबी, बेरोजगारी, भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसी चुनौतियों को समाप्त करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें और समानता के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं। सामाजिक न्याय दिवस हमें यह संदेश देता है कि बिना समान अवसरों के सच्ची प्रगति संभव नहीं।
कानूनी जागरूकता पर विशेष जोर
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य छोटाराम ईनाणिया सहित विद्यालय स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिक्षकों ने भी सामाजिक न्याय के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने तथा उनके अधिकारों के प्रति समझ विकसित करने का सार्थक प्रयास किया गया।
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