पादू कलां कस्बे में गुरुवार को चैत्र नवरात्र के अवसर पर वेदमाता गायत्री माता मंदिर में विधिवत घट स्थापना के साथ नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत हुई। इस मौके पर मंदिर के पुजारी कैलाश पारीक, पंडित रामअवतार सारस्वत और हस्तीमल उपाध्याय ने मंत्रोच्चार के साथ गणेश स्थापना कर पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।
मां शैलपुत्री के दर्शन का विशेष महत्व
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और मां पार्वती का प्रथम स्वरूप हैं। उनकी आराधना से यश, कीर्ति, धन और विद्या की प्राप्ति होती है तथा भय का नाश होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां शैलपुत्री के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हाथों में नारियल, फूल-माला और पूजा सामग्री लिए भक्त दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए। पूरे मंदिर परिसर में “जय माता दी” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। रियांबड़ी क्षेत्र के बिरदा माता मंदिर सहित आसपास के सभी मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई।

1100 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम
स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों के अनुसार, पादू कलां गांव की स्थापना लगभग 1100 वर्ष पूर्व हुई थी। उसी समय माकड़ माता की मूर्ति स्थापित की गई थी और सात जातियों का यहां आगमन हुआ था। तभी से नवरात्र पर्व को परंपरागत रीति-रिवाजों और गाजे-बाजे के साथ मनाया जाता रहा है। इस वर्ष भी पहले दिन भव्य रूप से घट स्थापना कर उत्सव की शुरुआत की गई।
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