फुलेरा, राजस्थान
रेलनगरी फुलेरा की पावन धरती पर चल रहे श्री रेलवे रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन मंचन ने ऐसा अलौकिक वातावरण रचा कि भक्तों की आंखें भक्ति और आस्था से छलक उठीं। निदेशक राजेश शर्मा के कुशल निर्देशन में मंचित अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, सीता स्वयंवर, रावण-बाणासुर संवाद और लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने रामायण के स्वर्णिम प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
जब प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष पिनाक तोड़ा, तो मंच पर आकाश मार्ग से भगवान शंकर-पार्वती का अवतरण और पुष्प वर्षा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

हर वर्ष की तरह इस बार भी उड़ान का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। निदेशक मदन मोहन बब्बू द्वारा सजीव किए गए इस दृश्य में कलाकारों ने खुले आसमान में विद्युत तारों के बीच झूलते हुए उड़ान भरी, जिससे दर्शकों का रोमांच चरम पर पहुँच गया।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन महोत्सव का चरम क्षण रहा। लक्ष्मण के तीखे वचनों से परशुराम का क्रोध फूट पड़ा और पूरा वातावरण धर्मसंकट की गंभीरता से भर गया। कथावाचक पंडित तुलसी सागर शर्मा के ओजस्वी वाचन ने इस प्रसंग को और प्रखर बना दिया।

रेलवे रामलीला कमेटी के सचिव देवकीनंदन जांगिड़ ने बताया कि सोमवार को अयोध्यापुरी रामलीला रंगमंच से श्रीराम की बारात नगर भ्रमण के लिए निकलेगी। बारात जनकपुरी पहुंचेगी, जहां रावणा राजपूत समाज फुलेरा द्वारा विवाह और कन्यादान की पावन रस्म संपन्न होगी।
महोत्सव में बजरंग दल फुलेरा की ओर से भक्तों के लिए नि:शुल्क शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई और जीआरपी तथा थाना फुलेरा पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही, जिससे श्रद्धालु निश्चिंत होकर रामलीला का आनंद ले सके। यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और तकनीकी साहस का अद्वितीय संगम है।
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