पोकरण |
यूरोपीय संघ (EU) के सहयोग से तथा GRAVIS द्वारा संचालित SABL परियोजना के अंतर्गत शुक्रवार को पोकरण फोर्ट रिसॉर्ट में वर्षभर की प्रगति की समीक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कृषि, महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण आजीविका से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
महिलाएँ कृषि और समाज की रीढ़ : माधो सिंह
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सांकड़ा नायब तहसीलदार श्री माधो सिंह ने कहा कि कृषि और महिलाओं का संबंध आजीवन रहा है। ग्रामीण भारत में महिलाएँ केवल खेतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था की मजबूती में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बीज बोने से लेकर फसल कटाई, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और विपणन तक महिलाओं की भागीदारी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यदि महिलाओं को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए तो समग्र सामाजिक विकास संभव है।

आत्मनिर्भर महिलाएँ बनती हैं सामाजिक परिवर्तन की वाहक : कुंवर परमविजय सिंह
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुंवर परमविजय सिंह ने कहा कि जब महिलाओं को स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध होते हैं तो इसका सीधा प्रभाव परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता पर पड़ता है।
उन्होंने SABL परियोजना के अंतर्गत शुरू किए गए कार्यक्रमों एवं वेबसाइट की सराहना करते हुए इसे पारदर्शिता और लाभार्थियों तक योजनाओं की सीधी पहुँच का सशक्त माध्यम बताया।
कृषि आधारित गतिविधियों से बनेगा आत्मनिर्भर समाज : डॉ. दशरथ प्रसाद
कृषि निदेशक डॉ. दशरथ प्रसाद ने कहा कि महिलाओं को कृषि आधारित गतिविधियों से निरंतर जोड़कर प्रशिक्षण और डिजिटल सहयोग दिया जाए तो एक मजबूत और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है।

SHG और ILG से महिला सशक्तिकरण : डी.एम. अशोक कुमार पालीवाल
राजीविका के प्रमुख डी.एम. अशोक कुमार पालीवाल ने बताया कि स्वयं सहायता समूह (SHG) और आजीविका हित समूह (ILG) के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। ऐसे समूह नेतृत्व क्षमता और सामूहिक निर्णय शक्ति को बढ़ावा देते हैं।
2000 गांवों में 25 लाख लोगों के साथ कार्यरत है GRAVIS
GRAVIS की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए केंद्र समन्वयक चेना राम माली ने बताया कि संस्था वर्तमान में लगभग 2000 गांवों में 25 लाख लोगों के साथ पेयजल, कृषि, पशुपालन, महिला सशक्तिकरण एवं वृद्धजन कल्याण के क्षेत्रों में कार्य कर रही है।
चार जिलों के 20 गांवों में संचालित है SABL परियोजना
परियोजना समन्वयक महितोष बगोरिया ने जानकारी दी कि SABL परियोजना थार मरुस्थलीय क्षेत्र के चार जिलों के 20 गांवों में संचालित की जा रही है। यह परियोजना महिला केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से लगभग 40,000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करेगी।
कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। अंत में कार्यक्रम का समापन केंद्र समन्वयक रमेश कुमार माली (बाड़मेर) द्वारा किया गया।
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