स्थान : रामदेवरा, जैसलमेर
रिपोर्ट : लक्ष्मण राम | थार क्रॉनिकल
मंगल आरती और श्रवण मुकुट स्थापना के साथ शुरू हुए दर्शन
धार्मिक नगरी रामदेवरा में पौष सुदी दूज के पावन अवसर पर लोकदेवता बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के बाबा की मंगल आरती के साथ श्रवण मुकुट की विधिवत स्थापना की गई, जिसके बाद समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

राजस्थान सहित अन्य राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शनों के लिए राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचे। भक्तों ने बाबा की समाधि पर शीश नवाकर प्रदेश में अमन-चैन, खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे परिसर में बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

समाधि समिति की ओर से पुख्ता व्यवस्थाएं
बाबा रामदेव समाधि समिति की ओर से श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। कतारबद्ध दर्शन, सुरक्षा, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर समिति के पदाधिकारी व सेवक लगातार मुस्तैद नजर आए।
सीओ भवानी सिंह व थानाधिकारी खेताराम गोदारा ने संभाली कमान
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पोकरण सीओ भवानी सिंह एवं रामदेवरा थानाधिकारी खेताराम गोदारा के नेतृत्व में पुलिस जाप्ते ने मोर्चा संभाला। पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं को लाइनों में व्यवस्थित कर सुरक्षित एवं सुचारू दर्शन कराने के प्रयास किए गए। अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।

मुख्य बाजार में रही जबरदस्त रौनक
पौष सुदी दूज के अवसर पर रामदेवरा के मुख्य बाजार में भी खासा उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के चलते बाजारों में चहल-पहल रही और दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई।

यातायात व्यवस्था बनी चुनौती
हालांकि पुलिस नाकाबंदी के बावजूद मुख्य बाजार क्षेत्र में सैकड़ों बड़े वाहनों के प्रवेश से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। भीड़ और वाहनों के दबाव के चलते श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं कुछ समय के लिए आवागमन भी बाधित रहा।

श्रद्धालुओं की प्रशासन से मांग
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक अवसरों पर यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए, ताकि आस्था के इस महापर्व पर किसी को असुविधा न हो।
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