जैसलमेर | संवाददाता
ग्रामीण अंचलों की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संभली ट्रस्ट, जैसलमेर द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। IIFL फाउंडेशन के सहयोग से संचालित ‘सखियों की बाड़ी’ परियोजना के अंतर्गत जिले के 20 गांवों में शिक्षण सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सैकड़ों बालिकाओं को मिला लाभ
इस कार्यक्रम के माध्यम से 4 से 14 वर्ष आयु वर्ग की सैकड़ों बालिकाओं को स्टेशनरी सामग्री, जूते एवं जुराबें वितरित की गईं। संसाधनों के अभाव में शिक्षा से दूर हो रही बालिकाओं के लिए यह पहल शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा और आत्मविश्वास का भी संबल बनी।
ड्रॉप-आउट बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए क्लस्टर हेड ललित पंवार ने संस्था के विजन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि ड्रॉप-आउट बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़कर उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बालिकाओं को घरेलू कार्यों से मुक्त कर नियमित रूप से केंद्रों पर भेजें, जिससे वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।

कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों का रहा सहयोग
सामग्री वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने में वसुंधरा, कुलसुम खान, अर्चना पंवार, सुमन मेघवाल, नर्बदा, उर्मिला, पूजा गोगली, सुशीला, रेणुका गोगली, संजू लीलावत, पुष्पा, पूजा, रजिया खातू, आशियत, संतोष चौहान एवं मनीषा गोमट सहित दक्षाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वहीं समाजसेवी कैलाश पंवार, एहसान मेहर, सुभाष पंवार एवं अरविंद पंवार के सहयोग से कार्यक्रम को जनभागीदारी का व्यापक समर्थन मिला।
50 केंद्रों के माध्यम से बदल रही सोच
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जैसलमेर जिले के सम एवं सांकड़ा ब्लॉक में कुल 50 ‘सखियों की बाड़ी’ केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनके माध्यम से बालिकाओं के शैक्षणिक स्तर में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है। संभली ट्रस्ट की यह पहल जैसलमेर की बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
Discover more from THAR CHRONICLE
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

