डोडियाना, नागौर दीपक सोनी
गाँव डोडियाना में मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। सूर्य के उत्तरायण होने के इस पावन अवसर पर ग्रामीणों ने प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए सेवा और पुण्य कर्मों को प्राथमिकता दी।
गौसेवा व जीवदया से हुई शुरुआत
पर्व की शुरुआत गौसेवा से की गई, जिसमें गाँव की गायों को श्रद्धापूर्वक लापसी खिलाई गई। वहीं जीवदया की भावना को साकार करते हुए कुत्तों को गुलगुले खिलाए गए, जिससे मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया।

महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
मकर संक्रांति के अवसर पर महिलाओं ने विशेष भूमिका निभाई। उन्होंने तिल-गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजन तैरंडा का वितरण कर पुण्य अर्जित किया और समाज में आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की। यह आयोजन उत्सव के साथ-साथ सेवा और संस्कारों का प्रतीक बनकर उभरा।
बुजुर्गों का सम्मान, संस्कृति का संवर्धन
गाँव की महिलाओं ने बुजुर्ग महिलाओं को कपड़े व आवश्यक वस्तुएँ भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में निहित सम्मान, स्नेह और पीढ़ियों के बीच आत्मीय जुड़ाव को दर्शाती है।
पतंगबाजी से दिखा उत्साह
पर्व के दौरान बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। दिनभर पतंगबाजी का दौर चला, जिससे गाँव का वातावरण उल्लास और उमंग से भर गया।
समग्र रूप से, डोडियाना में मकर संक्रांति का आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, करुणा और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला अवसर बना। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और नैतिक मूल्यों को समझने व अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
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