Tuesday, February 24, 2026
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जुसरी ग्रामीणों ने एसटीपी आवंटन के खिलाफ सौंपा ज्ञापन, आदेश रद्द करने की मांग

मकराना (रिपोर्टर: अब्दुल सलाम) — मकराना तहसील के जुसरी गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने सोमवार को तहसील स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचकर जिला कलेक्टर के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने 2 फरवरी 2026 को जारी किए गए आदेश संख्या ___ के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। उक्त आदेश में गांव के खसरा संख्या 178, निंबली नाड़ी की 15.1150 हेक्टेयर भूमि में से 3 हेक्टेयर भूमि को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए आवंटित किया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी आजीविका, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। पैदल ही हाथों में तख्तियां लेकर काफी संख्या में ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी की।

ज्ञापन में बताया गया है कि आवंटित भूमि के चारों ओर लगभग 50-60 घरों की आबादी है और एसटीपी की स्थापना के कारण निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भूमि मकराना से लगभग 8 किलोमीटर दूर होने तथा 100-150 फीट ऊंचाई पर स्थित होने के कारण नजदीकी और ऊंचाई वाली भूमि पर ही एसटीपी का निर्माण होना चाहिए।

ग्रामीणों ने बताया कि जुसरी गांव में दो गौशालाएं हैं, जिनमें लगभग 600 गायें इसी गौचर भूमि पर चरती हैं। निंबली नाड़ी की पानी की व्यवस्था से गायें तथा अन्य पशु इस इलाके में पानी पीते हैं। अगर एसटीपी यहीं स्थापित होता है तो इससे गौचर भूमि, पानी की गुणवत्ता और पशुओं की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसी भूमि पर इंदिरा गांधी नहर परियोजना स्थित है, जो मकराना, परबतसर, बोरावड़ समेत आसपास के 20 से अधिक गांवों को पीने के पानी की आपूर्ति करता है। ग्रामीणों का तर्क है कि एसटीपी से निकले गंदे पानी का रिसाव या अव्यवस्थित प्रबंधन इस महत्वपूर्ण जलापूर्ति को प्रभावित कर सकता है, जिससे आम जनता को नुकसान होगा।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि आवंटित खसरा संख्या के पास कई धार्मिक स्थल जैसे देवलाजी महाराज, झूझार जी महाराज, किश्शतेर जी महाराज और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जहाँ हजारों श्रद्धालु आते-जाते हैं। वहीं निंबली नाड़ी से होकर विभिन्न विद्युत लाइनें गुजरती हैं और नहर के पानी के प्लांट के लिए भी बिजली की व्यवस्था है, जिसे एसटीपी से नुकसान का खतरा है।

इस दौरान ज्ञापन सौंपने के मौके पर घासी राम भाकर, उगमा राम अणदा, महेन्द्र किरडोलिया, परसा राम टांडी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने एक स्वर में कहा कि स्थानीय भूमि का उपयोग उनकी आजीविका, पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य को देखते हुए ही तय होना चाहिए।


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